
विश्व प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर उज्जैन (Kaal Bhairav Mandir Ujjain) में शिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यहाँ हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अपना शीश झुकाते हैं। जहाँ यह मंदिर स्थित है, उसे भैरवगढ़ के नाम से भी जाना जाता है। यह भगवान शिव के रूद्र रूप भैरव बाबा को समर्पित है। स्कंद पुराण के अवंती कांड में इस मंदिर के बारे में बताया गया है।
भैरव बाबा को उज्जैन शहर का कोतवाल अर्थात रक्षक भी कहते हैं। यह उज्जैन के मुख्य महाकाल मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित है। यह वही मंदिर है जहाँ काल भैरव शराब पीते हैं। आज के इस लेख में हम आपके साथ काल भैरव उज्जैन का इतिहास सहित मंदिर की संपूर्ण जानकारी सांझा करने वाले हैं।
काल भैरव मंदिर उज्जैन | Kaal Bhairav Mandir Ujjain
काल भैरव मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी से लेकर 12वीं शताब्दी के बीच का माना जाता है जिसे उस समय के राजा भद्रसेन ने बनवाया था। स्कंद पुराण के अनुसार राजा भद्रसेन के द्वारा ही मुख्य मंदिर बनाने की बात कही गई है। उस समय की कई प्राचीन मूर्तियाँ भी प्राप्त हो चुकी हैं।
फिर भारत पर धीरे-धीरे मुगलों का आक्रमण बढ़ने लगा व उन्होंने हमारे कई मंदिर ध्वस्त कर दिए लेकिन काल भैरव मंदिर पर कोई आंच नहीं आई। इसका पुनः निर्माण मराठा काल के दौरान हुआ था जब मराठा योद्धा मुगलों से जमकर लोहा ले रहे थे। आइए जाने उस समय की कथा।
काल भैरव उज्जैन का इतिहास
अब हम उज्जैन के काल भैरव मंदिर के इतिहास (Kaal Bhairav Mandir Ujjain Story In Hindi) पर एक नज़र डाल लेते हैं। मुगल आक्रांताओं ने पश्चिम से उत्तर भारत तक भीषण रक्तपात मचाया था। मुगलों की सेना ने हिन्दुओं का व्यापक नरसंहार किया हुआ था। उनकी सेना जहाँ भी जाती, वहां हिन्दुओं के रक्त की नदियाँ बहा देती थी।
मुगलों की सेना से मुख्यतया राजपूत और मराठा राजाओं ने लोहा ले रखा था। इसमें प्रमुख नाम महाराणा प्रताप व छत्रपति शिवाजी का है। मराठा योद्धाओं में एक और राजा था जिन्होंने मुगलों से लोहा लिया था। उनका नाम था महादजी शिंदे या महादजी सिंधिया जो मध्यप्रदेश में ग्वालियर के राजा थे। मराठा योद्धाओं ने अपनी सेना को फिर से तैयार किया था और पानीपत का तीसरा युद्ध होने वाला था।
तब महादजी शिंदे उज्जैन के इसी काल भैरव मंदिर में गए और भैरव बाबा के चरणों में अपनी राजसी पगड़ी रख दी। उन्होंने संकल्प लिया कि मुगलों से विजय के पश्चात वे काल भैरव मंदिर का पुनर्निर्माण करवाएंगे। इसके बाद महादजी शिंदे की पानीपत के युद्ध में विजय हुई व उन्होंने मंदिर का विशाल निर्माण करवाया। तब से लेकर आज तक हर वर्ष शिंदे राज परिवार से उनकी राजसी पगड़ी भैरव बाबा के दरबार में आती है।
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काल भैरव उज्जैन की संरचना
वर्तमान में काल भैरव मंदिर उज्जैन (Kaal Bhairav Mandir Ujjain) की शिप्रा नदी के किनारे एक टीले पर स्थित है। इसके चारों ओर एक मोटी व विशाल दीवार का निर्माण करवाया गया था ताकि यह मुगलों के आक्रमण से बच सके। मंदिर अंदर से बहुत बड़ी जगह में फैला हुआ है। यहाँ पाताल भैरवी का मंदिर भी है। आइए उसके बारे में भी जान लेते हैं।
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पाताल भैरवी मंदिर
यह मुख्य द्वार से आगे चलकर बाईं दिशा में आता है जो नीचे की ओर बना हुआ है। यहाँ तक पहुंचने का रास्ता थोड़ा संकरा है व आपको कुछ सीढ़ियों से नीचे उतर कर यहाँ तक पहुंचना होगा। जहाँ माता भैरवी का मंदिर है उसे तलघर भी कहा जाता है। इधर भक्तगण बैठकर योग व साधना भी करते हैं।
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मंदिर के पास श्मशान घाट
यह मंदिर अपनी तांत्रिक विद्या व शक्तियों के लिए भी प्रसिद्ध है। काल अष्टमी व अन्य मुख्य तांत्रिक विद्या के दिनों में देश भर से कई तांत्रिक यहाँ आते हैं व मंदिर परिसर व श्मशान घाट पर पूजा अर्चना करते हैं। कहते हैं इन दिनों काल भैरव की पूजा करने से उनकी तांत्रिक विद्या में बढ़ोत्तरी होती है।
काल भैरव शराब क्यों पीते हैं?
यहाँ पर काल भैरव की जो मुख्य प्रतिमा है उससे यह एक रहस्य जुड़ा हुआ है जो इस मंदिर की विशेषता को और भी अधिक बढ़ा देता है। दरअसल काल भैरव की मूर्ति को प्रतिदिन भक्तों के द्वारा मुख्य रूप से मदिरा/ शराब का भोग लगाया जाता है। भक्तगण यहाँ मदिरा की बोतल लेकर आते हैं व पुजारी जी को दे देते हैं। पुजारी जी उस मदिरा को काल भैरव के मुँह के पास लगाते हैं तो आश्चर्यजनक रूप से वह मूर्ति शराब को अपने अंदर सोख लेती है।
आज तक लाखों करोड़ो लीटर की शराब वहां भक्तों के द्वारा चढ़ाई जा चुकी है। इसका रहस्य जानने के लिए कई बार मुगलों व अंग्रेजों के द्वारा जांच की गई लेकिन कोई वैज्ञानिक तथ्य सामने नहीं आया। यहाँ तक कि जब इस मंदिर के चारों ओर विशाल दीवार के निर्माण के लिए खुदाई हो रही थी तब भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुंचे थे ताकि वे इस मंदिर का रहस्य जान सकें।
कुछ लोगों का अनुमान था कि इस मंदिर के नीचे या आसपास कोई गुफा है जहाँ यह सब मदिरा जाती है लेकिन ऐसी कोई भी गुफा आज तक नहीं मिली। इसलिए इस मंदिर में लोगों की आस्था और भी अधिक बढ़ जाती है। दरअसल भगवान शिव का यह रूप तामसिक प्रवृत्ति का माना जाता है। तामसिक गुण का होने के कारण काल भैरव जी को मदिरा का भोग लगाया जाता है।
कहाँ से मिलेगी मदिरा?
मंदिर में मदिरा का भोग लगाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की ओर से मंदिर के बाहर ही पूजा की अन्य सामग्रियों के साथ शराब की बिक्री भी की जाती है। यहाँ आपको देसी व अंग्रेजी दोनों तरह की शराब मिलेगी जो आप काल भैरव को चढ़ा सकते हैं। इस बात का ध्यान रखिए कि आपको मूर्ति के पास जाने की अनुमति नहीं होती है इसलिए यह बोतल आपको पुजारी जी को देनी होती है। वे सबके सामने एक पात्र में डालकर भैरव बाबा को शराब चढ़ा देते हैं भक्तों के सामने ही काल भैरव उस मदिरा का सेवन कर लेते हैं।
उज्जैन काल भैरव कैसे पहुंचे?
यह मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से केवल 7 किलोमीटर व बस स्टैंड से लगभग 5 से 7 किलोमीटर दूर है। साथ ही यह उज्जैन के महाकाल मंदिर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए आपको आसानी से सभी प्रकार के वाहन जैसे कि बस, ऑटो, टैक्सी इत्यादि की सुविधा मिल जाएगी।
Kaal Bhairav Mandir Ujjain Timings
मंदिर आम भक्तों के लिए सुबह 5:30 बजे खुल जाता है व रात्रि 9 बजे के पास आरती के पश्चात बंद हो जाता है। मंदिर भ्रमण के लिए आधे घंटे का समय पर्याप्त है।
उज्जैन काल भैरव मंदिर की अन्य जानकारी
- हालाँकि इसका निर्माण 9वीं शताब्दी के बाद का माना जाता है लेकिन कुछ लोगों की मान्यता के अनुसार यह मंदिर लगभग छः हजार वर्ष पुराना है।
- पहले यहाँ भैरव बाबा को मांस इत्यादि भी चढ़ाने की परंपरा थी लेकिन समय के साथ उसे बंद कर दिया गया।
- कुछ लोगों के अनुसार पहले यहाँ पर केवल तांत्रिक लोगों को ही आने की अनुमति होती थी, सामान्य नागरिक यहाँ नहीं आ सकते थे।
- कुछ लोगों के अनुसार यहाँ मंदिर के अंदर भी पशु बलि की परंपरा थी किंतु वर्तमान में वह भी बंद है।
- यह केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है कि मंदिर में आज तक कितनी मदिरा चढ़ चुकी है क्योंकि भक्त प्रतिदिन ही यहाँ सैकड़ों लीटर शराब चढ़ा देते हैं।
इस तरह से आज आपने काल भैरव मंदिर उज्जैन (Kaal Bhairav Mandir Ujjain) की संपूर्ण जानकारी ले ली है। उज्जैन में महाकाल मंदिर के बाद भैरव बाबा का यह मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। ऐसे में भक्तगण दोनों मंदिर के ही दर्शन करके आते हैं।
काल भैरव मंदिर उज्जैन से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न: काल भैरव का रहस्य क्या है?
उत्तर: काल भैरव का रहस्य उनके द्वारा मदिरा का सेवन करना है। उज्जैन के प्रसिद्ध काल भैरव मंदिर में प्रतिदिन मदिरा का भोग लगाया जाता है।
प्रश्न: काल भैरव को शराब क्यों पीते हैं?
उत्तर: भगवान शिव के इस रूप को तामसिक प्रवृत्ति का माना जाता है। यही कारण है कि काल भैरव को प्रसाद रूप में शराब पिलाई जाती है।
प्रश्न: काल भैरव का दर्शन करने से क्या होता है?
उत्तर: काल भैरव का दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन से सभी संकट दूर हो जाते हैं और शत्रुओं का नाश होता है।
प्रश्न: उज्जैन से काल भैरव की दूरी कितनी है?
उत्तर: उज्जैन रेलवे स्टेशन से काल भैरव मंदिर की दूरी 5.9 किलोमीटर व उज्जैन बस स्टैंड से इसकी दूरी 5.7 किलोमीटर के पास है।
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