भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार क्यों लिया था? जाने इसका रहस्य

कूर्म अवतार (Kurma Avatar)

भगवान विष्णु का द्वितीय अवतार कूर्म अवतार (Kurma Avatar In Hindi) / कच्छप अवतार / कछुआ अवतार के नाम से जाना जाता है। यह अवतार उन्होंने देवताओं-दानवों के द्वारा समुद्र मंथन के समय मंदार पर्वत का भार अपनी पीठ पर उठाने के उद्देश्य से लिया था। इसी समुद्र मंथन से चौदह बहुमूल्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी जिससे विश्व का कल्याण हुआ था।

अब प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार भगवान विष्णु को कूर्म अवतार (Kurma Avatar Ki Kahani) लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी थी तथा इसके पीछे क्या उद्देश्य निहित थे? ऐसे में आज हम भगवान विष्णु के द्वारा कूर्म अवतार लेने के पीछे के रहस्य तथा उद्देश्य को समझेंगे।

कूर्म अवतार (Kurma Avatar In Hindi)

यह तो हम सभी जानते हैं कि भगवान विष्णु के कूर्म अवतार के कारण ही समुद्र मंथन का कार्य हो पाया था। वह इसलिए क्योंकि देव व दानवों ने जिस मंदार पर्वत की सहायता से समुद्र को मथने का कार्य किया था, उसके लिए कूर्म अवतार ने ही आधार बनाया था। अब यह सब भगवान विष्णु के द्वारा मुख्य रूप से तीन उद्देश्यों की पूर्ति के तहत किया गया था। आइए उनके बारे में जान लेते हैं।

#1. माँ लक्ष्मी को प्राप्त करना

विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के लिए समुद्र मंथन का प्रमुख उद्देश्य माँ लक्ष्मी को पुनः प्राप्त करना था। सृष्टि में प्रलय आने के बाद भगवान विष्णु का कार्य अत्यधिक बढ़ गया था तथा उन्हें पुनः सृष्टि का संचालन करना था। जब वे सृष्टि के उद्धार में व्यस्त थे तब माँ लक्ष्मी उनसे क्रुद्ध होकर क्षीर सागर की गहराइयों में समा गई थी।

इस कारण पृथ्वी पर वैभव, धन, संपदा विलुप्त हो गई थी तथा देवता इत्यादि भी श्रीहीन हो गए थे। इसलिए माँ लक्ष्मी को पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार (Kurma Avatar Ki Katha) लिया था। समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में से एक माँ लक्ष्मी भी थी।

#2. बहुमूल्य रत्नों को प्राप्त करना

महाप्रलय के पश्चात पृथ्वी से कई बहुमूल्य रत्न तथा औषधियां समुद्र की गहराइयों में समा गई थी जिन्हें प्राप्त करना पृथ्वी के हित में था। इन औषधियों तथा रत्नों के बिना पृथ्वी का उद्धार संभव नहीं था। इनमें से कुछ औषधियां व रत्न जैसे कि कल्प वृक्ष, पारिजात, कामधेनु इत्यादि थे। इसके अलावा चंद्रमा भी इसी समुद्र मंथन के दौरान निकला था। इसलिए इन सभी बहुमूल्य रत्नों को प्राप्त करने के उद्देश्य से भगवान विष्णु का कछुआ अवतार लेना अति-आवश्यक था।

#3. अच्छाई व बुराई का मिलन

इस अवतार को लेने के पीछे भगवान विष्णु का एक और गुप्त उद्देश्य था और वह यह समझाना था कि अच्छाई के बिना बुराई नहीं हो सकती तथा बुराई के बिना अच्छाई नहीं। समुद्र मंथन का कार्य ना केवल देवता अकेले कर सकते थे तथा ना ही दैत्य किंतु यह कार्य विश्व कल्याण के लिए होना अति-आवश्यक था। इसलिए उन्होंने देवताओं तथा दानवों को अलग-अलग लालच देकर यह कार्य करवाया।

इसके द्वारा उन्होंने यह शिक्षा दी कि किस प्रकार बुराई का भी सकारात्मक काम में सहयोग लिया जा सकता है, यह हम पर ही निर्भर करता है। हमारे मस्तिष्क में अच्छे व बुरे दोनों तरह के विचार आते हैं, इसलिए यह हम पर निर्भर करता है कि हम कैसे उन बुरे विचारों को सही दिशा में मोड़ते हैं।

कूर्म अवतार का वर्तमान के संदर्भ में उदाहरण

इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हम वर्तमान के संदर्भ में परमाणु ऊर्जा के तौर पर देख सकते हैं। परमाणु ऊर्जा एक शक्तिशाली ऊर्जा है लेकिन यह विश्व तथा मानव सभ्यता पर निर्भर करता है कि वह इस ऊर्जा का सदुपयोग करती है या दुरुपयोग। परमाणु ऊर्जा की सहायता से हम विश्व कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण औषधियों इत्यादि का निर्माण कर सकते हैं या इसका दुरुपयोग करके हम परमाणु बम भी बना सकते हैं।

उसी प्रकार कुछ भी कार्य करने से पहले हमें अपने मस्तिष्क तथा विचारों का भी मंथन करना चाहिए। चूँकि हमारा मस्तिष्क अनंत विचारों को समेटने की शक्ति रखता है तथा उनका मंथन करके यह हमें कई तरह के उपाय सुझाता है। अब यह हम पर निर्भर करता है कि हम किन विचारों को महत्ता देते हैं तथा किस प्रकार उसका सदुपयोग करते हैं।

इस प्रकार भगवान विष्णु ने अपने कूर्म अवतार (Kurma Avatar In Hindi) की सहायता से मानव सभ्यता को कई संदेश देने का प्रयास किया तथा सोच विचार करके ही कोई निर्णय लेने को कहा।

कूर्म अवतार से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न: भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार क्यों लिया था?

उत्तर: भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार कई उद्देश्यों की पूर्ति हेतु लिया था इसके माध्यम से माँ लक्ष्मी को पुनः प्राप्त करना, देवताओं को अमरत्व प्रदान करना तथा असुरों को भी बहुमूल्य रत्न उपलब्ध करवाना था

प्रश्न: कूर्म अवतार का अर्थ क्या है?

उत्तर: कूर्म अवतार का अर्थ होता है कछुए का अवतार भगवान विष्णु ने देव व दानवों की सहायता हेतु कछुए का अवतार लिया था इसे ही कूर्म या कच्छप अवतार कहा जाता है

प्रश्न: कूर्म पृथ्वी पर क्यों आया?

उत्तर: भगवान विष्णु को देवताओं और दानवों की समुद्र मंथन में सहायता करने हेतु कूर्म अवतार लेना पड़ा था यह उनका दूसरा अवतार था जिसके माध्यम से समुद्र मंथन का कार्य सही से हो पाया था

प्रश्न: कूर्म अवतार क्यों लिया गया था?

उत्तर: भगवान विष्णु के द्वारा कूर्म अवतार समुद्र मंथन का कार्य करने हेतु लिया गया था इसी कूर्म अवतार की पीठ पर ही मंदार पर्वत को रखा गया था और शेषनाग की सहायता से समुद्र मंथा गया था

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लेखक के बारें में: कृष्णा

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