
जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) को हिंदू धर्म के चार धामों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का सर्वप्रथम निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु के कुछ वर्षों के पश्चात करवाया था। वर्तमान में हम जो मंदिर देखते हैं वह राजा अनंतवर्मन के द्वारा जीर्णोद्धार करवाया हुआ है जिसे अंतिम रूप उनके पुत्र राजा अनंगभीम देव ने दिया था।
जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Mandir) बहुत विशाल है जो लगभग चार लाख वर्ग फुट (बत्तीस हज़ार मीटर) में फैला हुआ है। यह कुल 10.7 एकड़ का क्षेत्रफल है। मंदिर कलिंग राज्य की शैली में बना हुआ है जिसे उस समय के शिल्पकारों ने अद्भुत संरचना दी है। जो भी इसे देखता है, बस देखता ही रह जाता है।
यहाँ मुख्य मंदिर के अलावा 120 अन्य मंदिर व पूजा स्थल भी हैं। यह सभी मंदिर एक बाहरी दीवार के अंदर हैं जो लगभग 20 फीट (6.1 मीटर) ऊँची है। इस दीवार को मेघनंदा पाचेरी के नाम से जाना जाता है। आइए आज हम आपको जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला और संरचना के बारे में संपूर्ण जानकारी दे देते हैं।
Jagannath Puri | जगन्नाथ पुरी मंदिर की वास्तुकला
जगन्नाथ मंदिर का मुख्य गर्भगृह जहाँ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा की मूर्तियाँ स्थापित हैं वह कुर्म भेद्य दीवार से घिरा हुआ है। मुख्य गर्भगृह वक्र रेखीय आकार में बना हुआ है जो इसे अद्भुत आकार देता है। मंदिर का गर्भगृह 214 फीट (65 मीटर) ऊँचे पत्थर के चबूतरे पर स्थापित है तथा उसके ऊपर मूर्तियाँ रखी गई हैं। यह मूर्तियाँ रत्न मंडित चबूतरे के ऊपर विराजमान हैं।
मुख्य गर्भगृह को देउला या विमान के नाम से जाना जाता है। मंदिर में कुल 22 सीढ़ियाँ हैं जिसमें से तीसरी सीढ़ी पर बिना पैर रखे आगे बढ़ना होता है। कहते हैं कि जो श्रद्धालु इस सीढी पर पैर रख देते हैं, उन्हें जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Mandir) आने का कोई फल नहीं मिलता है। इसके अलावा, इस मंदिर में कई अन्य मंदिर, नील चक्र, मंडप इत्यादि है। आइए उनके बारे में भी जान लेते हैं।
नील चक्र
मुख्य मंदिर के शीर्ष पर एक विशाल चक्र स्थापित है जो पुरी में किसी भी स्थल से देखने पर यह अपने ओर मुख किए हुए ही प्रतीत होता है। इसे नील चक्र कहते हैं जो कि अष्ट धातु से निर्मित है। इस चक्र के अंदर आठ आरे हैं जिन्हें नवगुंजरस कहते हैं। इस चक्र के ऊपर ध्वज लगा होता है जिसे पतितपावन कहते हैं। इस ध्वज को प्रतिदिन बदला जाता है तथा यह वायु की विपरीत दिशा में बहता है।
सिंहद्वार
मंदिर में प्रवेश करने के चार द्वार हैं जिसमें से सिंहद्वार मुख्य है। इस द्वार के द्वारा मुख्य गर्भगृह में प्रवेश किया जा सकता है। इस द्वार पर दोनों ओर बड़े सिंह की आकृति बनी हुई है। यह द्वार पूर्व दिशा में स्थित है जहाँ से अंदर एक बड़ा मार्ग खुलता है। इसके अलावा तीन अन्य द्वार हैं जो उत्तर, दक्षिण व पश्चिम दिशा में खुलते हैं। इनके नाम भी द्वार पर बनाई गई पशुओं के मूर्त रूप पर रखे गए हैं। इनके नाम हैं हाथीद्वार, व्याघ्रद्वार तथा अश्वद्वार जो क्रमशः हाथी, चीता तथा घोड़े को प्रदर्शित करते हैं।
अन्य मंदिर
मुख्य मंदिर के अलावा यहाँ कई अन्य मंदिर भी स्थित हैं। कहने का अर्थ यह हुआ कि जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) के अलावा यहाँ कई अन्य मंदिर भी हैं। इसमें से एक मंदिर तो 51 शक्तिपीठों में से एक है तो वहीं दूसरे मंदिर का संबंध जगन्नाथ रथयात्रा से माना जाता है। आइए दोनों के बारे में जान लेते हैं।
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विमला मंदिर
विमला मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ की मान्यता प्राप्त है। माता सती की नाभि यहाँ गिरी थी और उसके बाद से यह स्थल और मंदिर सभी भक्तों के लिए पूजनीय हो गया। इस मंदिर के पास में रोहिणी कुंड भी है।
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महालक्ष्मी मंदिर
जब भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है तब महालक्ष्मी की मूर्ति को मुख्य गर्भगृह में स्थापित किया जाता है अन्यथा माता रूष्ट हो जाती है। कुछ अन्य मंदिर भगवान गणेश, भगवान श्रीराम, भगवान नरसिंह, माँ सरस्वती, सूर्य देव, भक्त हनुमान इत्यादि को समर्पित हैं।
मंडप
सबसे मुख्य मंडप मुक्ति मंडप है जहाँ मंदिर के मुख्य पुजारी व ब्राह्मण बैठकर मंदिर से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैं। इसके अलावा एक डोला मंडप है जो डोल यात्रा उत्सव के लिए प्रसिद्ध है। एक स्नान बेदी है जहाँ वर्ष में एक बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को तीनों मूर्तियों को स्नान करवाया जाता है।
इस तरह से आज आपने जगन्नाथ पुरी (Jagannath Puri) की वास्तुकला और संरचना के बारे में संपूर्ण जानकारी ले ली है। मंदिर के पास ही समुद्र है जो यहाँ आने वाले भक्तों का मन मोह लेता है।
जगन्नाथ पुरी से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न: पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में क्या खास है?
उत्तर: पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में यह बात सबसे ज्यादा ख़ास है कि यहाँ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियों का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण के हृदय से किया गया है। साथ ही यह चार धाम में से एक धाम है।
प्रश्न: जगन्नाथ पुरी किस राज्य में है?
उत्तर: जगन्नाथ पुरी उड़ीसा राज्य में स्थित है। उड़ीसा भारत के पूर्वी हिस्से में पड़ता है। यह उड़ीसा राज्य के पुरी जिले में समुद्र किनारे स्थित बना हुआ एक विशाल मंदिर है।
प्रश्न: जगन्नाथ पुरी कौन से दिशा में है?
उत्तर: जगन्नाथ पुरी भारत की पूर्व दिशा में स्थित है। भारत की चारों दिशाओं में चार धाम स्थित है। इसमें पूर्व दिशा में जगन्नाथ पुरी, पश्चिम दिशा में द्वारकाधीश, उत्तर दिशा में बद्रीनाथ और दक्षिण दिशा में रामेश्वरम धाम है।
प्रश्न: जगन्नाथ मंदिर में किसकी पूजा की जाती है?
उत्तर: जगन्नाथ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के ही एक रूप भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है। भगवान जगन्नाथ के साथ ही उनके दोनों भाई-बहन बलभद्र (बलराम) और सुभद्रा की पूजा भी यहाँ की जाती है।
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