डांडिया कैसे खेलते हैं? जाने डांडिया कहां का नृत्य है

डांडिया रास (Dandiya In Hindi)

जब भी नवरात्र का नाम आता है तब सभी को डांडिया रास (Dandiya In Hindi) भी याद आ जाता होगा। इसे डांडिया डांस या तलवार नृत्य के नाम से जाना जाता है। इसका संबंध माँ दुर्गा व भगवान श्रीकृष्ण से है। इसमें डांडिया माँ दुर्गा का प्रतिनिधित्व करता है तो रास श्रीकृष्ण की लीलाओं का। दोनों का अद्भुत संगम ही डांडिया रास के नाम से जाना जाता है।

अब आपके डांडिया रास को लेकर कई तरह के प्रश्न होंगे। जैसे कि डांडिया कैसे खेलते हैं (Dandiya Kaise Khelte Hain), डांडिया कहां का नृत्य है, डांडिया के लिए वेशभूषा क्या पहने, इत्यादि। ऐसे में आज हम आपको डांडिया रास के बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे।

Dandiya In Hindi | डांडिया रास

अश्विन मास के नवरात्र के समय दुर्गा पूजा की जाती है तथा दसवें दिन पूरे भारत में दशहरा व विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन श्रीराम ने रावण का वध किया था व साथ ही माँ दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का। डांडिया का संबंध माँ दुर्गा का महिषासुर राक्षस के साथ हुए युद्ध से ही है। इसमें डांडिया की छड़ें माँ दुर्गा की तलवार का प्रतिनिधित्व करती हैं जिनसे महिलाएं खेलती हैं। यह महिलाओं की शक्ति तथा ऊर्जा का प्रतीक होती है।

वहीं रास का संबंध श्रीकृष्ण से है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा राधा व गोपियों संग वृंदावन में लगातार छह माह तक रचाई गई रासलीला को भले कौन नहीं जानता होगा। यह वह समय था जब श्रीकृष्ण केवल राधा के ही नहीं अपितु सभी गोपियों के थे। उस समय छह माह तक चंद्रमा अस्त नहीं हुआ था तथा सूर्य उदय नहीं हुआ था, मानो सब थम सा गया था।

उस पूर्णिमा की रात को श्रीकृष्ण ने सभी गोपियों संग जो रासलीला रचाई थी वह प्रेम की चरम सीमा थी। इसमें कान्हा गोपियों के साथ पूर्ण भाव से नृत्य कर रहे थे तथा डांडिया खेल रहे थे। इसी को रास कहा गया। डांडिया रास का मुख्यतया संबंध श्रीकृष्ण के द्वारा रचाई गई रासलीला से ही है।

डांडिया कहां का नृत्य है?

चूँकि भगवान श्रीकृष्ण का संबंध मथुरा व वृंदावन से रहा है तो डांडिया वहाँ खेला जाता था। किंतु श्रीकृष्ण ने एक समय के बाद अपनी राजधानी मथुरा को छोड़कर गुजरात के द्वारका में बसा ली थी। इसलिए डांडिया को गुजरात का पारंपरिक नृत्य माना जाता है तथा इसकी पहचान भी वहीं से है।

डांडिया को मुख्य रूप से गुजरात राज्य तथा राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में खेला जाता है किंतु समय के साथ-साथ इसकी प्रसिद्धि भी बढ़ती गई। अब इसका आयोजन देश के लगभग हर कोने में किया जाता है। पहले गुजरात में ही पंडाल सजाकर इसका आयोजन किया जाता था लेकिन अब दिल्ली, मुंबई इत्यादि शहरों में भी इसका मुख्य रूप से आयोजन किया जाता है।

डांडिया रास कब खेला जाता है?

जैसा कि हमने आपको बताया कि डांडिया रास (Dandiya In Hindi) को खेलने की शुरुआत नवरात्रों के शुरू होने से ही हो जाती है। यह संध्या में माँ दुर्गा की आरती करने के बाद जश्न के रूप में खेला जाता है। नवरात्र के अंतिम दिनों में इसकी धूम देखने लायक होती है। इसके अलावा इसे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, राधा अष्टमी, होली इत्यादि अवसरों पर भी खेला जाता है। आजकल यह इतना आम हो गया है कि लोग इसे विवाह इत्यादि उत्सवों में भी जश्न के रूप में खेलने लगे हैं।

Dandiya Kaise Khelte Hain | डांडिया कैसे खेलते हैं?

इसके लिए सबसे पहला जो नियम है वो यह है कि यह हमेशा जोड़ी में ही खेला जाता है। इसे कितने भी लोग खेल सकते हैं लेकिन उनकी संख्या विषम ना हो अर्थात जोड़ी में ही हो जैसे कि 10, 16, 88 इत्यादि, ना कि 9, 13, 93 इत्यादि।

इसे खेलने के लिए सभी को 10 से 12 इंच लंबी व रंग-बिरंगी छड़ी हाथ में लेनी होती है व फिर सामने वाले से ताल में ताल मिलाते हुए डांडिया खेलना होता है। यह संगीत के साथ खेला जाता है जो पहले धीमा होता है व बाद में तेज हो जाता है। इस प्रकार यह एक तरह से शक्ति व ऊर्जा का प्रतीक होता है।

  • डांडिया के लिए वेशभूषा

यह माँ दुर्गा के साथ-साथ श्रीकृष्ण से भी संबंधित है, इसलिए इसे लड़का व लड़की दोनों खेल सकते हैं। इसमें महिलाओं को घाघरा-चोली, कढ़ाईदार ब्लाउज पहनने होते हैं तथा सोलह श्रृंगार करके आना होता है। तो वहीं पुरुषों को कुर्ता-पायजामा व पगड़ी पहननी होती है। तभी असली रंग में भंग जमता है।

  • डांडिया का आधुनिक स्वरुप

समय के साथ-साथ यह देश के बड़े आयोजनों में सम्मिलित हो गया है। पहले इसे सामान्य तरीके से आयोजित किया जाता था लेकिन अब इसकी जगह बड़े-बड़े आयोजनों ने ले ली है। जहाँ पर जाने के लिए टिकट इत्यादि की व्यवस्था होती है। इन आयोजनों में प्रसिद्ध हस्तियों जैसे कि बॉलीवुड के कलाकार, गायक, राजनीति से जुड़े लोगों इत्यादि को बुलाया जाता है।

कुछ भी कहिए लेकिन लोग आज भी इसे उसी जोश व उत्साह के साथ खेलते हैं जैसे पहले खेलते थे। डांडिया रास (Dandiya In Hindi) है ही एक ऐसा नृत्य जो सभी के अंदर जोश भर देता है व देखने वाले रोमांचित हो जाते हैं।

डांडिया रास से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न: डांडिया रास की कहानी क्या है?

उत्तर: डांडिया रास की कहानी भगवान श्रीकृष्ण व माँ दुर्गा से जुड़ी हुई है यह दो अलग-अलग कहानियां है जो श्रीकृष्ण द्वारा रासलीला रचाने और माँ दुर्गा के द्वारा महिषासुर वध करने से संबंधित है

प्रश्न: डांडिया का मतलब क्या होता है?

उत्तर: डांडिया माँ दुर्गा के द्वारा महिषासुर से युद्ध करने का प्रतिनिधित्व करता है इसी उपलक्ष्य में हर वर्ष डांडिया नृत्य किया जाता है

प्रश्न: डांडिया कब शुरू होता है?

उत्तर: डांडिया नवरात्रों के समय में शुरू हो जाता है और पूरे नवरात्र चलता है उसी समय माँ दुर्गा का महिषासुर के साथ युद्ध हुआ था जिस कारण डांडिया खेला जाता है

प्रश्न: डांडिया की उत्पत्ति कैसे हुई?

उत्तर: डांडिया की उत्पत्ति मां दुर्गा के द्वारा महिषासुर राक्षस के साथ युद्ध करने से हुई थी फिर श्रीकृष्ण ने इसे रास में बदलकर डांडिया रास बना दिया था

नोट: यदि आप वैदिक ज्ञान 🔱, धार्मिक कथाएं 🕉️, मंदिर व ऐतिहासिक स्थल 🛕, भारतीय इतिहास, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य 🧠, योग व प्राणायाम 🧘‍♂️, घरेलू नुस्खे 🥥, धर्म समाचार 📰, शिक्षा व सुविचार 👣, पर्व व उत्सव 🪔, राशिफल 🌌 तथा सनातन धर्म की अन्य धर्म शाखाएं ☸️ (जैन, बौद्ध व सिख) इत्यादि विषयों के बारे में प्रतिदिन कुछ ना कुछ जानना चाहते हैं तो आपको धर्मयात्रा संस्था के विभिन्न सोशल मीडिया खातों से जुड़ना चाहिए। उनके लिंक हैं:

अन्य संबंधित लेख:

Recommended For You

लेखक के बारें में: कृष्णा

सनातन धर्म व भारतवर्ष के हर पहलू के बारे में हर माध्यम से जानकारी जुटाकर उसको संपूर्ण व सत्य रूप से आप लोगों तक पहुँचाना मेरा उद्देश्य है। यदि किसी भी विषय में मुझ से किसी भी प्रकार की कोई त्रुटी हो तो कृपया इस लेख के नीचे टिप्पणी कर मुझे अवगत करें।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *