कालरात्रि माता का मंत्र क्या है? जाने कालरात्रि माता की पूजा विधि

कालरात्रि माता की कथा (Kalratri Mata)

नवरात्र के सातवें दिन नवदुर्गा के सप्तम रूप कालरात्रि माता (Kalratri Mata) की पूजा करने का विधान है। मां कालरात्रि का रूप अंधकार के समान एक दम काला तथा भयानक है जिनकी उत्पत्ति पापियों का नाश करने के उद्देश्य से हुई थी। माँ कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों को रात्रि या अंधकार भय तथा ग्रहों के दोष से मुक्ति मिलती है। जहाँ एक ओर माँ पापियों का नाश करने वाली तो दूसरी ओर भक्तों को अभय देने वाली हैं।

कालरात्रि माता की कथा भी बहुत रोचक है जिसके बारे में आज हम आपको बताएंगे। इसी के साथ ही आपको कालरात्रि माता का मंत्र (Kalratri Mata Mantra) भी पढ़ने को मिलेगा। इसके जाप से आपको कई लाभ देखने को मिलते हैं। आइए माँ कालरात्रि के बारे में संपूर्ण जानकारी ले लेते हैं।

Kalratri Mata | कालरात्रि माता की कथा

एक समय शुंभ-निशुंभ तथा रक्तबीज नाम के राक्षसों ने स्वर्ग लोक में त्राहिमाम मचा दिया था। उनके भय से सभी देवता कैलाश पर्वत पर भगवान शिव से सहायता मांगने के लिए गए। तब भगवान शिव ने माता पार्वती से देवताओं की रक्षा करने का अनुरोध किया।

माँ पार्वती ने अपने तेज से माँ दुर्गा को प्रकट किया जिन्होंने राक्षसों की सेना के साथ भयंकर युद्ध किया। माँ ने शुंभ-निशुंभ राक्षस का वध कर दिया किंतु जब रक्तबीज का वध किया तब उसके शरीर से निकली रक्त की बूंदे भूमि पर गिरी। उस राक्षस के रक्त की जितनी भी बूंदे भूमि पर गिरी उससे उतने ही रक्तबीज राक्षसों का और निर्माण हो गया। फिर दुर्गा माँ ने उन रक्तबीजों का भी वध कर डाला लेकिन उनके रक्त की भी जितनी बूंदे भूमि पर गिरी उससे और रक्तबीज बन गए।

यह देखकर दुर्गा माँ ने अपनी शक्ति से एक और माता का निर्माण किया जिनका नाम कालरात्रि था। यह माता अपना भयंकर रूप लिए हुए थी। उसके बाद जैसे ही माँ दुर्गा रक्तबीज का वध करती तो उसके शरीर के रक्त की बूंदे माँ कालरात्रि भूमि पर गिरने से पहले ही पी जाती। इस प्रकार माँ दुर्गा ने एक-एक करके सभी रक्तबीज राक्षसों का वध कर दिया तथा Maa Kalratri ने उनका रक्त पी लिया व राक्षसों का संपूर्ण नाश हो गया।

मां कालरात्रि का स्वरूप

माँ का रूप अंधकार रुपी एक दम काला है। इनकी पूजा से काल के दोष से मुक्ति मिलती है तथा यह रात्रि के समान भयंकर रूप वाली है। इसी कारण इनका नाम कालरात्रि पड़ा था। माँ की चार भुजाएं हैं जिसमें से दाईं ओर की नीचे वाली भुजा वर मुद्रा में तथा ऊपर वाली भुजा अभय मुद्रा में है। बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में वज्र तथा नीचे वाली भुजा में गंडासा लिए हुए हैं जिससे वे पापियों का नाश करती हैं।

इसी के साथ Kalratri Mata के तीन नेत्र हैं जो ब्रह्मांड के समान गोल हैं। माँ के बाल खुले हुए तथा त्वचा का रंग एक दम काला है। उनके गले में एक विद्युत के समान चमकती हुई माला है तथा उनका वाहन गर्धभ/ गधा है।

कालरात्रि का अर्थ

कालरात्रि दो शब्दों के मेल से बना हुआ है। इसमें काल का अर्थ समय से है। इससे तात्पर्य मां कालरात्रि काल की भी काल है। जिस प्रकार भगवान शिव को महाकाल कहा जाता है, ठीक उसी तरह यह उनका स्त्री रूप महाकाली का परिचायक है। इसमें दूसरा शब्द रात्रि है जो माता के गुणों या रूप को प्रदर्शित करता है। कालरात्रि माता का स्वरुप रात्रि के समान अंधकारमय व काला है।

इस कारण उनके नाम में रात्रि शब्द को भी जोड़ा गया है। ऐसे में कालरात्रि का अर्थ काल की भी काल और रात्रि के अंधकार के समान रंग लिए हुए मातारानी से है।

Kalratri Mata Mantra | कालरात्रि माता का मंत्र

यदि आप कालरात्रि माता की कृपादृष्टि अपने ऊपर बनाए रखना चाहते हैं तो उसके लिए आपको मां कालरात्रि मंत्र का जाप करना चाहिए। कालरात्रि माता की पूजा करते समय नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करने से सर्वोत्तम लाभ देखने को मिलता है। ऐसे में आइए मां कालरात्रि मंत्र पढ़ लेते हैं।

  • माँ कालरात्रि बीज मंत्र

क्लीं ऐं श्री कालिकायै नमः।

  • मां कालरात्रि मंत्र

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।

वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयन्करि॥

  • कालरात्रि ध्यान मंत्र

जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तु ते॥

  • मां कालरात्रि स्तुति

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

इस तरह से आपने कालरात्रि माता का मंत्र (Kalratri Mata Mantra) के बारे में संपूर्ण जानकारी ले ली है। वैसे तो आप इन मंत्रों का जाप वर्ष के किसी भी दिन कर सकते हैं लेकिन नवरात्र के सातवें दिन इन मंत्रों का जाप करने से कालरात्रि माता जल्दी प्रसन्न होती हैं।

कालरात्रि माता की पूजा विधि

इसके लिए प्रातःकाल उठकर स्नान करें तथा चौकी पर Maa Kalratri की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके पश्चात माँ की अक्षत, धूप, पुष्प तथा कुमकुम से पूजा करें। पुष्पों में माँ कालरात्रि को रातरानी का पुष्प सबसे अधिक प्रिय है। इसलिए इस पुष्प को पूजा में अवश्य सम्मिलित करें। इसी के साथ ही आपको ऊपर दिए गए कालरात्रि मंत्रों का जाप करना है। मंत्रों का जाप करते समय कालरात्रि माता के स्वरुप का ध्यान करें और बुरे विचारों को मन से निकाल दें।

कालरात्रि माता का भोग

कालरात्रि माता की पूजा करते समय उन्हें उनकी प्रिय चीज़ को भोग के रूप में चढ़ाया जाता है तो माँ जल्दी प्रसन्न होती हैं। मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बनी हुई चीजें बहुत प्रिय है। इसलिए आप या तो सीधे गुड़ का भोग ही Kalratri Mata को लगा सकते हैं अन्यथा गुड़ की बनी खीर या कोई मिठाई का भोग भी उन्हें लगाया जा सकता है।

माँ कालरात्रि का महत्व

माता कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक है लेकिन यह भक्तों को हमेशा शुभ फल देने वाली होती है। इसलिए इनका एक नाम शुभंकारी भी है। विचित्र बात यह है कि Maa Kalratri का रूप तो बहुत भयानक और डराने वाला है लेकिन वास्तव में माँ अपने भक्तों का डर दूर करने के लिए जानी जाती हैं। उनका यह रूप भक्तों को अभय प्रदान करता है।

कालरात्रि माता की पूजा करने से भक्तों के मन से अग्नि, जल, रात्रि व अंधकार के भय दूर होते हैं। कहने का तात्पर्य यह हुआ कि जिस किसी पर भी माँ कालरात्रि की कृपा दृष्टि हो जाती है, उनके जीवन को इन चारों कारकों से कोई संकट नहीं होता है। साथ ही Kalratri Mata की कृपा से उनके भक्तों के साहस व वीरता में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है।

कालरात्रि माता से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न: माता कालरात्रि की उत्पत्ति कैसे हुई?

उत्तर: जब माँ दुर्गा राक्षसों के साथ युद्ध कर रही थी तब रक्तबीज राक्षस का वध करना अत्यंत मुश्किल था ऐसे में माँ दुर्गा ने अपना कालरात्रि रूप प्रकट किया जो रक्तबीज का लहू भूमि पर गिरने से पहले ही पी जाती थी

प्रश्न: कालरात्रि कौन सी देवी है?

उत्तर: मां दुर्गा के 9 रूपों में से कालरात्रि माता उनका सातवाँ रूप है यह रूप अत्यधिक भयंकर व प्रचंड दिखने वाला है उनका यह रूप भक्तों के भय को दूर करने वाला माना जाता है

प्रश्न: मां दुर्गा के कालरात्रि नाम क्यों पड़ा है?

उत्तर: मां दुर्गा ने रक्तबीज नामक राक्षस का वध करने के लिए अपना कालरात्रि रूप प्रकट किया था अपने इस रूप में उन्होंने रक्तबीज राक्षस के रक्त की बूंदों को भूमि पर गिरने से पहले ही पी लिया था

प्रश्न: कालरात्रि का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर: मां कालरात्रि का दूसरा नाम शुभंकरी है वह इसलिए क्योंकि माँ अपने भक्तों के लिए हमेशा शुभ कार्य करने के लिए जानी जाती हैं उनकी कृपा से भक्तों के मन से सभी तरह के भय दूर हो जाते हैं

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लेखक के बारें में: कृष्णा

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