भगवान शिव ने विष क्यों पिया था? जाने इसका रहस्य

क्या आप यह जानने को यहाँ आए हैं कि शिव जी ने विष क्यों पिया (Shiv Ji Ne Vish Kyu Piya) और इसके पीछे क्या कारण निहित थे!! यह कथा बहुत ही रोचक है जो देवता तथा दैत्यों के द्वारा समुंद्र मंथन से जुड़ी हुई है। इसी घटना के बाद भगवान शिव का एक और नाम नीलकंठ पड़ गया था।

हालाँकि यहाँ प्रश्न यह उठता है कि भगवान शिव ने विष क्यों पिया था (Bhagwan Shiv Ne Vish Kyu Piya Tha) जबकि समुद्र मंथन का कार्य तो भगवान विष्णु के आदेश पर देव-दानव कर रहे थे। आज हम भगवान शिव का समुंद्र मंथन में योगदान तथा उनके द्वारा विष पीने की कथा के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Shiv Ji Ne Vish Kyu Piya | शिव जी ने विष क्यों पिया?

जब सृष्टि में महाप्रलय आई थी तब बहुत से अनमोल रत्न तथा औषधियां समुंद्र की गहराई में समा गए थे। तब भगवान विष्णु से आज्ञा पाकर देवता तथा दानवों ने मिलकर समुंद्र को मथने का निश्चय किया जिससे उन्हें अमृत तथा अन्य अनमोल रत्नों की प्राप्ति हो सके। इस कार्य के लिए भगवान विष्णु ने उन्हें मथनी के तौर पर मंदार पर्वत तथा रस्सी के लिए वासुकी नाग दिया व स्वयं कूर्म अवतार लेकर मंदार पर्वत का भार अपनी पीठ पर सहन किया।

कहते हैं ना हर अच्छाई के साथ बुराई भी जुड़ी होती है। यदि अमृत की प्राप्ति करनी थी तो उसकी जितनी मात्रा में विष का निकलना भी निश्चित था। देवता तथा दैत्यों के द्वारा समुंद्र को मथने का कार्य चल ही रहा था कि उसमें से अथाह मात्रा में विष निकल पड़ा। इसी विष को हलाहल के नाम से जाना जाता है। यह विष इतना ज्यादा भयंकर तथा विषैला था कि संपूर्ण सृष्टि में हाहाकार मच गया।

इसमें से तीव्र मात्रा में विषैली गैसे निकल रही थी जिसे देखकर देवता तथा दैत्यों दोनों में भय व्याप्त हो गया। कोई भी इस विष के पास नहीं जाना चाहता था तथा ना ही किसी में इतनी क्षमता थी। यह विष संपूर्ण सृष्टि का नाश कर सकता था।

भगवान शिव ने विष क्यों पिया था?

आखिरकार भगवान शिव जी ने ही विष क्यों पिया था (Bhagwan Shiv Ne Vish Kyu Piya Tha) जबकि समुद्र मंथन का कार्य तो देव-दानव कर रहे थे। आइए जानते हैं।

समुद्र मंथन के समय जब अथाह मात्रा में हलाहल निकला तो देवता तथा दानवों को कोई उपाय नहीं सुझा। ऐसे में सभी देवों के देव महादेव के पास सहायता मांगने गए। उन्होंने महादेव से इसका कोई उपाय निकालने की याचना की। जब महादेव ने देखा कि इस विष के द्वारा संपूर्ण सृष्टि का विनाश संभव है। साथ ही इसे ग्रहण करने की क्षमता किसी और के अंदर नहीं है तब स्वयं उन्होंने उस विष को पीने का निश्चय किया।

इसके पश्चात महादेव ने उस विष का प्याला लिया तथा एक पल में ही संपूर्ण विष अपने कंठ में उतार लिया। यह देखकर माता पार्वती ने महादेव के कंठ पर हाथ रखा तथा उस विष को नीचे उतरने से रोक लिया। इसी के कारण वह विष महादेव के कंठ में ही रुक गया। इस विष का प्रभाव इतना ज्यादा था कि महादेव का कंठ नीला पड़ गया।

तब से महादेव को नीलकंठ के नाम से भी बुलाया जाने लगा अर्थात जिसका कंठ/ गला नीले रंग का हो। इस तरह से आज आपने जान लिया कि शिव जी ने विष क्यों पिया (Shiv Ji Ne Vish Kyu Piya) और इसके पीछे क्या कारण था।

भगवान शिव के विष पीने से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न: भगवान शिव ने जहर क्यों पिया?

उत्तर: समुद्र मंथन के समय अथाह मात्रा में विष/ जहर निकला था जिससे संपूर्ण सृष्टि का नाश हो सकता था ऐसे में सृष्टि कल्याण के उद्देश्य से भगवान शिव ने स्वयं उस विष को पी लिया था

प्रश्न: शिव के जहर पीने के बाद क्या हुआ?

उत्तर: शिव के जहर पीने के बाद माता पार्वती ने उनके कंठ पर हाथ रखा और विष को नीचे उतरने से रोक दिया इस कारण विष भगवान शिव के गले में रह गया और उनका गला नीला पड़ गया

प्रश्न: विष पीने से महादेव का क्या हुआ?

उत्तर: भगवान शिव ने जो विष पिया था, वह उनके गले में ही रुक गया था इस कारण उनका कंठ नीला पड़ गया था यही कारण है कि भगवान शिव का एक नाम नीलकंठ भी प्रसिद्ध हुआ

प्रश्न: शिव को विष से किसने बचाया?

उत्तर: भगवान शिव को अथाह विष के प्रभाव से उनकी पत्नी पार्वती ने बचाया था माता पार्वती ने शिवजी के कंठ पर हाथ रख कर विष को नीचे उतरने से रोक दिया था

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लेखक के बारें में: कृष्णा

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