
रामायण में त्रिजटा कौन थी (Trijata Kaun Thi) व क्यों उसे माता सीता से सहानुभूति थी? त्रिजटा रावण की नगरी में एक ऐसी राक्षसी थी जिसका जन्म तो राक्षस कुल में हुआ था लेकिन उसका हृदय देवियों के समान पवित्र था। वह रावण को दुष्ट व पापी समझती थी व भगवान विष्णु में विश्वास रखती थी। ऐसे में एक प्रश्न यह भी उठता है कि त्रिजटा पिछले जन्म में कौन थी?
रावण के द्वारा माता सीता का अपहरण किये जाने के पश्चात उन्हें अशोक वाटिका में बंदी बनाकर रखा गया था। माता सीता की सुरक्षा का मुख्य प्रभार त्रिजटा (Trijata Ramayan) को ही सौंपा गया था। उस समय उसने अपनी बुद्धिमता से माता सीता को संभाला था। आज हम माता त्रिजटा के बारें में जानेंगे।
Trijata Kaun Thi | त्रिजटा कौन थी?
त्रिजटा के जन्म के बारे में वाल्मीकि रामायण व तुलसीदास की रामचरितमानस में तो नही बताया गया है। हालांकि कुछ अन्य भाषाओँ में त्रिजटा के बारें में भिन्न-भिन्न विवरण सुनने को मिलते हैं। सबसे प्रमुख मान्यता के अनुसार त्रिजटा को रावण के छोटे भाई विभीषण व उनकी पत्नी सरमा की पुत्री बताया गया हैं। कुछ अन्य रामायण में त्रिजटा को रावण व विभीषण की बहन के रूप में दर्शाया गया है।
किसी भी बात को प्रमाणिक तौर पर नही कहा जा सकता लेकिन यह निश्चित है कि उसका जन्म एक राक्षस कुल में हुआ था फिर भी उसके अंदर राक्षसी प्रवत्ति के गुण नामात्र थे। वह हमेशा माता सीता की सच्ची मित्र के रूप में याद की जाती है। आइए माता त्रिजटा के बारे में और जान लेते हैं।
त्रिजटा पिछले जन्म में कौन थी?
बहुत लोग त्रिजटा के पिछले जन्म के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे में हम पहले ही यह पश्त कर दे कि किसी भी तरह की रामायण में त्रिजटा के पिछले जन्म के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। ऐसे में त्रिजटा पिछले जन्म में क्या थी और उसकी क्या भूमिका रही, यह केवल और केवल एक रहस्य है।
Trijata Ramayan | त्रिजटा की रामायण में भूमिका
जब रावण छल के द्वारा माता सीता को पंचवटी से अपने पुष्पक विमान में उठाकर ले आया तो उसने माता सीता को अशोक वाटिका में रखा। रावण के द्वारा माता त्रिजटा को ही सीता की सुरक्षा सौंपी गयी व सभी राक्षसियों का प्रमुख बनाया गया। रामायण में त्रिजटा की भूमिका भी यही से शुरू हुई थी जिसमे उन्होंने स्वयं के चरित्र को ऐसा दिखाया जिससे वह आमजनों के दिल में हमेशा के लिए बस गयी।
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माता सीता की दुःख की साथी
जब माता सीता रावण के द्वारा अपहरण कर लंका में लायी गयी तब वह अत्यंत विलाप कर रही थी। साथ ही अशोक वाटिका में अन्य राक्षसियां उन्हें तंग कर रही थी। यह देखकर त्रिजटा ने अपनी बुद्धिमता से बाकि राक्षसियों को चुप करा दिया था व माता सीता को ढांढस बंधाया था। त्रिजटा के कारण ही माता सीता को उस राक्षस नगरी में रहने की शक्ति मिली व उनका विलाप कम हुआ था।
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माता सीता की गुप्तचर
वैसे तो माता त्रिजटा रावण की सेविका थी लेकिन वह भगवान श्रीराम की विजय में विश्वास रखती थी। उसनें अपने व माता सीता के बीच के संबंधों को जगजाहिर नही होने दिया किंतु हर पल वह माता सीता को हर महत्वपूर्ण जानकारी देती थी जैसे कि लंका का दहन होना, समुंद्र पर रामसेतु बनना, राम लक्ष्मण का सुरक्षित होना इत्यादि। त्रिजटा के द्वारा समय-समय पर माता सीता को जानकारी देते रहने से उनकी हिम्मत बंधी रहती थी।
रावण की मृत्यु के बाद त्रिजटा
अंत में भगवान श्रीराम व दशानन रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ व उसमें रावण मारा गया। इसके पश्चात विभीषण को लंका का अधिपति बनाया गया व उन्होंने तुरंत माता सीता को मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। त्रिजटा माता सीता के जाने से तो दुखी थी लेकिन प्रसन्न भी थी कि अब सब विपत्ति टल गयी।
अग्नि परीक्षा के बाद जब माता सीता भगवान श्रीराम के पास आई तब उन्होंने माता त्रिजटा के वात्सल्य व प्रेम के बारे में उन्हें बताया। यह सुनकर सभी बहुत खुश हुए व भगवान राम व माता सीता ने त्रिजटा को इतने पुरस्कार दिए कि अब जीवनभर उन्हें कुछ करने की आवश्यकता नही थी। साथ ही त्रिजटा को लंका में भी विभीषण के द्वारा अहम उत्तरदायित्व व उचित सम्मान दिया गया।
कुछ मान्यताओं के अनुसार माता त्रिजटा भगवान राम व माता सीता के साथ पुष्पक विमान में बैठकर अयोध्या भी आई थी व कुछ दिनों तक उनके साथ रही थी। कुछ जगह लंका विजय के बाद यह बताया गया है कि विभीषण ने भगवान हनुमान से अनुरोध किया था कि वे उनकी बेटी त्रिजटा से विवाह कर ले।
इसके बाद हनुमान ने त्रिजटा से विवाह किया जिन्हें उन्हें एक पुत्र तेगनग्गा (असुरपद) प्राप्त हुआ। कुछ समय तक वहां रहने के पश्चात हनुमान वहां से चले गए। इस तरह से आपने त्रिजटा कौन थी (Trijata Kaun Thi) व रामायण में उसकी क्या भूमिका रही थी, के बारे में विस्तार से जानकारी ले ली है।
त्रिजटा से संबंधित प्रश्नोत्तर
प्रश्न: त्रिजटा का पति कौन था?
उत्तर: थाईलैंड की रामायण के अनुसार रावण की मृत्यु के पश्चात विभीषण के कहने पर हनुमान ने त्रिजटा से विवाह किया था। इस तरह से त्रिजटा के पति का नाम हनुमान है।
प्रश्न: त्रिजटा कौन थी उसने क्या सपना देखा?
उत्तर: त्रिजटा अशोक वाटिका में माता सीता की अंगरक्षिका थी। उसने श्रीराम की विजय और रावण की दुर्गति का सपना देखा था।
प्रश्न: त्रिजटा किसकी पुत्री है?
उत्तर: त्रिजटा को लंका के राजा विभीषण और उनकी पत्नी सरमा की पुत्री माना जाता है। इस तरह से वह रावण की भतीजी थी।
प्रश्न: त्रिजटा का वध किसने किया?
उत्तर: त्रिजटा का वध किसी ने नहीं किया था। रावण की मृत्यु के बाद उसे श्रीराम व विभीषण के द्वारा कई उपहार दिए गए थे।
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