नवरात्रि मनाने के पीछे क्या कहानी है? जाने नवरात्रि की कथा

Navratri In Hindi

सनातन धर्म में नवरात्रि का त्यौहार (Navratri In Hindi) मुख्य रूप से मनाया जाता है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसे भारतवर्ष के हरेक राज्य व जिले में मनाया जाता है। आपमें से बहुत लोगों को पता नहीं होगा लेकिन आज हम आपको बता दें कि वर्ष में कुल दो नहीं बल्कि चार नवरात्र आते हैं। इनमें से दो मुख्य तथा दो गुप्त नवरात्र होते हैं। चैत्र तथा अश्विन मास के नवरात्र को मुख्य माना जाता है जिन्हें बसंत तथा शारदीय/ अश्विन नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है।

इन दोनों ही नवरात्र की पूजा विधि में कोई अंतर नहीं है। आश्विन मास की नवरात्रि को महानवरात्र के नाम से जाना जाता है जो दशहरे से पहले पड़ती है। गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि व महत्व अलग होते हैं। साथ ही मुख्य नवरात्रि की कहानी (Navratri Ki Katha) और गुप्त नवरात्रि की कहानी भी अलग है। आज के इस लेख में हम आपको मुख्य नवरात्रों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जाने नवरात्रि त्यौहार के बारे में।

Navratri In Hindi | नवरात्रि की कहानी

हम हर वर्ष दो बार नवरात्रि का त्यौहार मनाते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार पहली नवरात्रि चैत्र मास की नवरात्रि होती है। चैत्र माह से ही नए वर्ष की शुरुआत होती है। ऐसे में इस नवरात्र को चैत्र नवरात्र कहा जाता है। उस समय वसंत का मौसम होता है। इस कारण इसे वसंत या बसंत नवरात्रि भी कह दिया जाता है। वहीं दूसरी नवरात्रि को अश्विन नवरात्रि के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार अश्विन मास में पड़ती है। उस दौरान शरद ऋतु होती है जिस कारण इसे शारदीय नवरात्र कह दिया जाता है।

अब इन दोनों ही नवरात्रि की पूजा विधि, व्रत, मंत्र, मातारानी के रूप, मनाने के तरीके इत्यादि में कोई भी अंतर देखने को नहीं मिलता है। एक तरह से यह एक ही त्यौहार है जो हर वर्ष दो बार आता है। साथ ही इन दोनों नवरात्रि के बीच में छह माह का अंतर देखने को मिलता है। हालाँकि दोनों नवरात्रि में से यदि एक मुख्य नवरात्रि की बात हो तो उसमें अश्विन मास की नवरात्रि आती है। वह इसलिए क्योंकि नवरात्रि की कथा इसी से जुड़ी हुई है।

हालाँकि अश्विन मास की नवरात्रि (Navratra In Hindi) को शुरू करने का श्रेय भगवान श्रीराम को जाता है। श्रीराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था जो भगवान विष्णु के सातवें पूर्ण अवतार थे। इस अवतार में उनका मुख्य उद्देश्य दुष्ट रावण का अंत करना था। जब रावण ने माता सीता का हरण कर लिया था तो श्रीराम ने वानर सेना के साथ लंका पर चढ़ाई कर दी थी। इसके बाद श्रीराम व रावण की सेना के बीच कई दिनों तक युद्ध चला था। इस युद्ध में रावण के कई योद्धा मारे गए थे।

रावण अत्यधिक शक्तिशाली राजा था जिसने तीनो लोकों पर अधिकार कर लिया था। ऐसे में श्रीराम को उसके साथ युद्ध पर जाने से पहले माँ आदिशक्ति के आशीर्वाद की आवश्यकता थी। इस कारण उन्होंने रावण युद्ध से पहले मातारानी के नौ रूपों की नौ दिनों तक पूजा की थी। इससे प्रसन्न होकर मातारानी ने श्रीराम को विजयी होने का आशीर्वाद दिया था। फिर अंतिम दिन अर्थात दसवें दिन श्रीराम ने पापी रावण का वध कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी।

  • चैत्र नवरात्रि

यह वर्ष के पहले नवरात्रि होते हैं। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात एकम से शुरू होते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह मार्च से अप्रैल महीने के बीच में पड़ता है। चैत्र नवरात्रि की शुरुआत को ही हिंदू धर्म के नव वर्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद पूरे नौ दिनों तक मातारानी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। विशेष बात यह है कि चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन भगवान श्रीराम का जन्मदिन भी मनाया जाता है। इसे राम नवमी के नाम से जाना जाता है।

  • अश्विन नवरात्रि

चैत्र नवरात्रि के छह माह के पश्चात अश्विन नवरात्रि आते हैं। यह नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा अर्थात एकम को शुरू होते हैं। चैत्र नवरात्रि की तरह ही अश्विन नवरात्रि भी नौ दिनों तक मनाए जाते हैं। अश्विन नवरात्रि के समाप्त होते ही दशहरा का पर्व मनाया जाता है। यह वही दिन है जिस दिन भगवान श्रीराम ने राक्षस राजा रावण का वध किया था। इस तरह से अश्विन मास की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। हालाँकि इस दिन विजयादशमी भी मनाया जाता है जिसके पीछे नवरात्रि की कहानी ही जुड़ी हुई है। आइए उसके बारे में भी जान लेते हैं।

नवरात्रि की कथा (Navratri Ki Katha)

नवरात्रि की कथा माँ दुर्गा से जुड़ी हुई है। माँ दुर्गा को ही माँ आदिशक्ति के नाम से जाना जाता है। सनातन धर्म में ईश्वर को मुख्य रूप से शिव व शक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है। शिव पुरुषत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि शक्ति स्त्रीत्व का। ऐसे में मातारानी के सभी रूप माँ दुर्गा या माँ आदिशक्ति का ही रूप माने जाते हैं।

नवरात्र की कहानी के अनुसार एक समय राक्षस राजा महिषासुर का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया था। वह भैंसे के शरीर का था जिसने तप करके असीमित शक्तियां अर्जित कर ली थी। उसकी शक्तियां इतनी बढ़ गई थी कि उसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग लोक को भी जीत लिया था। हर दिन के साथ देवताओं और मनुष्यों पर उसका और उसकी राक्षसी सेना का आतंक बहुत बढ़ गया था। ऐसे में सभी देवता भगवान विष्णु, शिव व ब्रह्मा से सहायता मांगने गए थे।

तब सभी देवताओं ने अपनी शक्ति को एकत्रित कर माँ दुर्गा का आह्वान किया था। माँ दुर्गा ने अपना प्रचंड रूप लिया जिसके कई हाथ थे। उनके हरेक हाथ में अस्त्र-शस्त्र थे और मुंह अत्यधिक क्रोधित। प्रकट होते ही माँ दुर्गा देवताओं की सेना के साथ युद्ध में कूद पड़ी। उन्होंने महिषासुर की सेना के साथ नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया था।

इस दौरान माँ ने अपने भिन्न-भिन्न रूपों की सहायता ली थी। फिर अंतिम दिन अर्थात् दसवें दिन उन्होंने महिषासुर का वध कर दिया था। ऐसे में नवरात्रि में नौ दिनों तक मातारानी के नौ रूपों की पूजा करने के बाद दसवें दिन उनकी महिषासुर पर विजय के रूप में विजयादशमी का त्यौहार मनाया जाता है।

माँ दुर्गा के नौ रूप

नवरात्र (Navratri In Hindi) में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है जिन्हें नवदुर्गा भी कहते हैं। इनमें से हरेक का अपना गुण व विशेषता है। एक तरह से मातारानी ने भक्तों की इच्छाओं के अनुरूप अपने अलग-अलग रूप धारण किए हैं। भक्तगण उनके उसी रूप की पूजा कर अपनी इच्छापूर्ति का आशीर्वाद पा सकते हैं। आइए जाने नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके बारे में संक्षिप्त परिचय।

#1. माँ शैलपुत्री

माँ शैलपुत्री को शिला के समान दृढ़ माना जाता है। इनकी आराधना करने से मन को स्थिर करने में सहायता मिलती है। इससे हमारा मन विचलित नहीं होता है और हम अपना ध्यान केंद्रित कर किसी काम को कर पाते हैं।

#2. माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से हमारा आत्म-विश्वास मजबूत होता है। यदि आपके मन में किसी चीज का भय रहता है या अनहोनी के होने की आशंका बनी रहती है तो वह सब समस्या दूर होती है।

#3. माँ चंद्रघंटा

माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से भी हमारे मन का भय दूर होता है। साथ ही आपके अंदर शक्ति का संचार होता है। आप बलशाली व साहसिक प्रवृत्ति के बनते हैं।

#4. माँ कूष्मांडा

माँ कूष्मांडा की पूजा करने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। यदि आपको किसी भी तरह की शारीरिक या मानसिक समस्या रहती है तो आपको कूष्मांडा माता की पूजा करनी चाहिए। इससे काया निरोगी और मन सकारात्मक बना रहता है।

#5. माँ स्कंदमाता

माँ स्कंदमाता हमारे मन से बुरे व दूषित विचारों को दूर करती है। यदि किसी को संतान प्राप्ति नहीं हो रही है तो वह भी स्कंदमाता के आशीर्वाद से जल्दी प्राप्त होती है।

#6. माँ कात्यायनी

माँ कात्यायनी की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है। यदि आपके जीवन में किसी तरह की समस्या, संकट, रूकावट इत्यादि है तो माँ कात्यायनी की कृपादृष्टि से वह दूर होती है।

#7. माँ कालरात्रि

माँ कालरात्रि की पूजा करने से भक्तों के मन से अग्नि, जल व अंधकार का भय दूर होता है। एक तरह से आपके जीवन को इन तीनों से कोई नुकसान नहीं होता है।

#8. माँ महागौरी

माँ महागौरी की पूजा करने से पुरुष व स्त्री को अलग-अलग लाभ देखने को मिलते हैं। जहाँ एक ओर स्त्री को उचित वर मिलता है या वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है तो पुरुष के अपनी पत्नी या जीवनसाथी के साथ संबंध बेहतर बनते हैं।

#9. माँ सिद्धिदात्री

माँ सिद्धिदात्री भक्तों की हरेक इच्छा पूरी करने के लिए जानी जाती है। इनकी पूजा करने से हमें सभी तरह की सिद्धियाँ प्राप्त होती है और जीवन में किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं रहता है।

इस तरह से माँ के हरेक रूप का अपना अलग महत्व, गुण व विशेषता है। ऐसे में इनकी पूजा करने से मिलने वाले लाभ भी अलग-अलग होते हैं। इस कारण नवरात्रि (Navratra In Hindi) के शुभ अवसर पर मातारानी के सभी नौ रूपों की पूजा हो जाती है। इससे भक्तों को मातारानी के सभी रूपों का आशीर्वाद मिलता है और उनका जीवन सुखमय बनता है।

नवरात्र के नियम

कुछ लोग नवरात्र में जोड़ी में व्रत रखते हैं जैसे कि दो दिन या चार दिन तो कुछ लोग पूरे नवरात्र व्रत (Navratri In Hindi) रखते हैं। ऐसे समय में आपको कई नियमों का पालन करना पड़ता है। जो लोग व्रत नहीं भी रखते हैं तब भी उन्हें नवरात्र के समय कुछ नियम मानने होते हैं। एक तरह से कहा जाए तो नवरात्रि के कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं जिनका पालन हर किसी को करना होता है। वे हैं:

  • नाखून नहीं काटना
  • बाल नहीं काटना व दाढ़ी नहीं बनाना
  • प्याज, लहसुन नहीं खाना
  • मांस, अंडा इत्यादि नहीं खाना
  • मदिरा का सेवन या धुम्रपान नहीं करना इत्यादि।

नवरात्र व्रत के नियम

अब आपने ऊपर जो नियम पढ़े, वह हर किसी के लिए थे। हालाँकि यदि आप नवरात्रि में व्रत रखने जा रहे हैं तो आपको कुछ अन्य नियमों का भी पालन करना होता है। आइए उनके बारे में भी जान लेते हैं।

  • प्रतिदिन जल्दी उठकर स्नान करना व मातारानी की पूजा करना
  • केवल सात्विक भोजन करना
  • शारीरिक संबंध नहीं बनाना
  • मन पर नियंत्रण रखना व क्रोध नहीं करना
  • दिन में नहीं सोना इत्यादि।

हालाँकि नवरात्रि के और भी कई नियम होते हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए यदि आप नवरात्र के सभी नियमों के बारे में जानना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करें

नवरात्रि में व्रत का खाना

अब आप सोच रहे होंगे कि नवरात्र (Navratra In Hindi) में क्या-क्या बनाया जा सकता है। यदि आप नवरात्रि फलाहार रख रहे हैं तो इसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता है जैसे कि नवरात्र में व्रत के दिनों में कुछ चीज़ों का प्रयोग पूर्णतया निषेध होता है, जैसे कि:

  • सभी प्रकार के अनाज (कुट्टू के आटे के अलावा)
  • सरसों का तेल
  • दालें
  • साधारण नमक
  • चावल इत्यादि।

इसलिए आप नवरात्र में फलों का सेवन करें तथा एक समय के लिए ही भोजन करें। भोजन में आप कई तरह के व्यंजन बना सकते हैं। जैसे कि कुट्टू के आटे की पूड़ियाँ या रोटियां, आलू की सब्जी, साबूदाने की खीर या खिचड़ी, थालीपीठ, आलू हलवा, मखाना खीर, समा चावल का पुलाव इत्यादि।

अष्टमी या नवमी को कंजके जिमाना

नवरात्र में हम नौ दिन मातारानी के विभिन्न रूपों की पूजा करते हैं लेकिन यह पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक हम अपने घर में नौ कन्याओं को ना जिमा दें। इससे अर्थ यह हुआ कि नवरात्र के आठवें या नौवें दिन जिसे अष्टमी या नवमी भी कहते हैं उस दिन अपने घर में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की नौ कन्याओं को आमंत्रित किया जाता है।

फिर सभी घरवाले पूरी विधि-विधान के साथ उनकी पूजा अर्चना करते हैं व घर पर बना प्रसाद खिलाते हैं। इस प्रसाद में मुख्य रूप से हलवा, पूड़ी व एक सब्जी होती है। खाना खिलाने के पश्चात उन्हें प्रणाम करके कुछ उपहार या पैसे देकर घर से विदा किया जाता है।

कंजकों के लिए गिफ्ट

चूँकि सभी कन्याएं आयु में बहुत छोटी होती हैं इसलिए आप उपहार भी उन्हें उनके अनुसार ही दें। वैसे आप पैसे भी दे सकते हैं लेकिन उसके साथ यदि कोई छोटा-मोटा उपहार भी दे दिया जाए तो बच्चियां खुश हो जाती हैं। इसलिए आप अपने बजट के अनुसार उन 9 कन्याओं के लिए कोई न कोई उपहार खरीद सकते हैं। जैसे कि:

  • गुल्लक
  • टेडीबियर
  • टिफ़िन बॉक्स
  • स्कूल बैग
  • कहानियों की पुस्तक
  • मेकअप का सामान
  • चॉकलेट या कैंडी
  • खिलौने
  • कपड़े
  • कलर बॉक्स इत्यादि।

नवरात्रि की बधाई संदेश

आजकल सोशल मीडिया का जमाना है व सभी लोग नवरात्र (Navratri In Hindi) आने पर अपने चाहने वालों को बधाई संदेश भेजने के भी इच्छुक होंगे। लो फिर हम आपकी इसमें सहायता कर देते हैं।

#1. सभी हो जाओ तैयार, मेरी माँ आने वाली है,

सजा लो अपने आँगन को, मेरी माँ दुर्गा आने वाली है।

#2. बिन बुलाए भी जिसकी चौखट पर जाने को जी चाहता है,

बस ऐसा ही है मेरी माँ का दरबार, जहाँ हर कोई आनंद पाता है।

ऐसे ही और संदेश पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

नवरात्र में इन बातों का ध्यान रखें 

अंत में हम आपको बताना चाहेंगे कि इस शुभ समय पर कुछ बातें हैं जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए। जैसे कि:

  • नवरात्र के दिनों में अपने मन को शुद्ध व पवित्र रखें तथा किसी को कटु वचन कहने से बचें।
  • महिलाओं का सम्मान करने की आदत बनाएं। इसकी शुरुआत आप नवरात्र के पावन अवसर से कर सकते हैं। उनका सम्मान करने का अर्थ यह नहीं कि आप उनका निरादर ना करें बल्कि उन्हें विभिन्न चीज़ों में महत्ता देना सीखें तथा उसमें उनकी राय भी लें।
  • इन नौ दिनों में किसी भी प्रकार के मांस-मदिरा या तंबाकू जैसी हानिकारक चीजों से पूर्णतया दूरी बनाकर रखें।
  • प्रतिदिन जल्दी स्नान करने की आदत डालें व उसके बाद कुछ देर के लिए मातारानी के सामने हाथ जोड़ें व उनकी चरण वंदना करें।
  • इन नौ दिनों में चमड़े से बनी चीजों को इस्तेमाल नहीं करें, जैसे कि बेल्ट, पर्स इत्यादि।

इसके अलावा भी आपको कुछ और बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता है इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप यहाँ क्लिक करें और जाने। इस तरह से आज आपने नवरात्रि की कहानी (Navratri Ki Katha) सहित इसकी संपूर्ण जानकारी ले ली है।

नवरात्र से संबंधित प्रश्नोत्तर

प्रश्न: नवरात्रि की असली कहानी क्या है?

उत्तर: नवरात्रि की असली कहानी माँ दुर्गा के द्वारा राक्षस महिषासुर का वध करने से जुड़ी है जब महिषासुर का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया था तब सभी देवताओं ने अपनी शक्ति एकत्रित कर माँ दुर्गा का आह्वान किया था इसके बाद माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया था

प्रश्न: नवरात्रि मनाने के पीछे क्या कहानी है?

उत्तर: नवरात्रि मनाने के पीछे माँ दुर्गा के द्वारा महिषासुर का वध करने से जुड़ी कहानी है माँ दुर्गा ने महिषासुर के साथ नौ दिनों तक भीषण युद्ध किया था और फिर दसवें दिन उसका वध कर दिया था

प्रश्न: नवरात्रि के पीछे का इतिहास क्या है?

उत्तर: नवरात्रि के पीछे का इतिहास भगवान श्रीराम के द्वारा माँ के नौ रूपों की उपासना करने से जुडा हुआ है रावण के साथ युद्ध से नौ दिन पहले श्रीराम ने माँ दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की उपासना की थी

प्रश्न: 9 देवी नवरात्रि का इतिहास क्या है?

उत्तर: 9 देवी नवरात्रि का इतिहास माँ दुर्गा के द्वारा अपने नौ रूप लेने से जुड़ा हुआ है माँ दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध करने के लिए अपने नौ रूप धारण किए थे और फिर उसका वध किया था

नोट: यदि आप वैदिक ज्ञान 🔱, धार्मिक कथाएं 🕉️, मंदिर व ऐतिहासिक स्थल 🛕, भारतीय इतिहास, शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य 🧠, योग व प्राणायाम 🧘‍♂️, घरेलू नुस्खे 🥥, धर्म समाचार 📰, शिक्षा व सुविचार 👣, पर्व व उत्सव 🪔, राशिफल 🌌 तथा सनातन धर्म की अन्य धर्म शाखाएं ☸️ (जैन, बौद्ध व सिख) इत्यादि विषयों के बारे में प्रतिदिन कुछ ना कुछ जानना चाहते हैं तो आपको धर्मयात्रा संस्था के विभिन्न सोशल मीडिया खातों से जुड़ना चाहिए। उनके लिंक हैं:

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लेखक के बारें में: कृष्णा

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